भाग्यालक्ष्मी अंगूठी

कछुए वाली अंगूठी को वास्तुशास्त्र के अनुसार शुभ माना गया है। यह अंगूठी व्यक्ति के जीवन के कई दोषों को शांत करने का काम करती हैै जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत के साथ-साथ इंसान का भाग्य का साथ होना भी जरूरी है कछुए को हमेशा सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कछुए की अंगूठी पहनने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है

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यही कछुआ भगवान विष्णु का भी अवतार रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था और साथ ही देवी लक्ष्मी भी वहीं से आईं थीं।


यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में कछुए को इतना महत्व प्रदान किया जाता है। कछुए को देवी लक्ष्मी के साथ जोड़कर धन बढ़ाने वाला माना गया है। इसके अलावा यह जीव धैर्य, शांति, निरंतरता और समृद्धि का भी प्रतीक हैे।

जानें इसकी खासियत

कछुआ शांति और प्रेम की वृति वाला जीव होने से इसके चित्रण को अंगूठी में धारण करने से मनुष्य में शांति और प्रेम की वृति बढ़ती है, जिससे उसे सकारात्मक अनुभव होते है।।।


*घर के वातावरण को बनाता है खुशहाल
*लव लाइफ को रखता है बेहतरे हैं।
*स्वास्थ्य में भी होता है सुधार
*करियर के लिए भी बेहतर
*नकारात्मक ऊर्जा को करता है दूर

कैसे करें प्रयोग

ध्यान रखें कि इस अंगूठी के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले व्यक्ति की ओर आना चाहिए। कछुए का मुख बाहर की ओर होगा तो धन आने की बजाए हाथ से चला जाएगा।

शुक्रवार को पहनें

शुक्रवार के दिन ही इस अंगूठी को खरीदें और घर लाकर लक्ष्मी जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने कुछ देर रख दें। फिर इसे दूध और पानी के मिश्रण से धोएं और अंत में अगरबत्ती कर पहन लें। यदि आप चाहें तो इस दौरान मां लक्ष्मी के बीज मंत्र का निरंतर जाप भी कर सकते है।

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